न्यूटन के गति नियम (Newton's Laws of Motion) - ldkalink

न्यूटन के गति नियम (Newton's Laws of Motion): इससे पहले वाले आर्टिकल में हमने जड़त्व के बारे में जाना था जिसमे गैलीलियो ने अपने जड़त्व संबंधित प्रयोग के बारे में बताया था।

इसके बाद सर आइसेक न्यूटन (Sir Issac Newton) ने गैलीलियो के द्वारा किए गए जड़त्व संबंधी प्रयोग के कार्य को आगे बढ़ाते हुए गति से संबंधित नियम को विस्तार से एवम क्रमबद्ध अध्यन किया और फिर गति के तीन नियम के बारे में बताया जो की निम्न है।


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न्यूटन के गति नियम (Newton's Laws of Motion)


न्यूटन के गति नियम (Newton's Laws of Motion in Hindi)


प्रथम नियम (Newton's first law of motion) 

परिभाषा (definition) यदि कोई "वस्तु स्थिर है तो स्थिर ही रहेगा, यदि गतिमान है तो उसी दिशा में गतिमान ही रहेगी, जब तक उस पर बाह्य बल न लगाए जाए" यह गति का प्रथम नियम कहलाता है गति के प्रथम नियम को जड़त्व का नियम (Law Of Inertia) भी कहा जाता है।

गति का प्रथम नियम उदाहरण (Example)

गति के प्रथम नियम के दो भाग होते हैं जिसमें पहला भाग विराम के जड़त्व से संबंधित है जबकि दूसरा भाग गति के जड़त्व से संबंधित है अब इसके बारे में थोड़ा विस्तार से जान लेते हैं।  

पहला भाग - विराम का जड़त्व: 

गति के प्रथम नियम का पहला भाग जो कि विराम के जड़त्व से संबंधित होता है जिसमें यदि कोई वस्तु विराम अवस्था में होती है तो वह उसी अवस्था में बना रहता है जब तक कि उस पर कोई बाह्य बल न लगाया जाए। 

विराम के जड़त्व से संबंधित उदाहरण हम अपने दैनिक जीवन में देखते ही हैं आपने कभी नोटिस किया होगा कि कमरे में रखी हुई वस्तुएं जैसे की कुर्सी, टेबल, पंखा इत्यादि।

अब यदि ये सभी वस्तुएं स्थिर अवस्था में होती है तो वह उसी अवस्था में बनी रहती है जब तक कि उस पर कोई बाह्य बल ना लगाया जाए अतः वह अपने आप से अपनी स्थिति में परिवर्तन नहीं कर पाता है।

दूसरा भाग - गति का जड़त्व: 

न्यूटन के गति का प्रथम नियम का दूसरा भाग जो कि गति के जड़त्व से संबंधित होता है इस नियम के अनुसार यदि कोई वस्तु एक समान वेग से गति कर रही है तो वह एक समान गति से ही गति करते रहेगी जब तक की उस पर कोई बाह्य बल लगाकर रोका न जाए। 

गति के जड़त्व का उदाहरण दैनिक जीवन में देख पाना असम्भव होता या मुस्किल सा होता है उदारण के लिए मान लेते है कोई बाल फर्श पर गति कर रही है तो वह थोड़ी देर बाद कुछ दूरी तय करके रुक जाती है।

फर्श और बाल के बीच में घर्षण बल लगने के कारण ही बाल थोड़ी देर बाद रुक जाती है अगर यदि दोनो सतहों के बीच घर्षण बल नही लगता तो वस्तु जिस वेग से गति कर रही है वह उसी वेग से ही चलते रहेगा। 

द्वितीय नियम (Newton's second law of motion)


किसी "वस्तु के संवेग में परिवर्तन की दर उस पर लगाए गए बल के अनुत्क्रमानुपाती होता है।" मान लो कोई वस्तु है जो की एक समान वेग से गति कर रही है तो इस स्थिति में न्यूटन के प्रथम नियम से इस वस्तु पर लगने वाला नेट बल शून्य होता है।

अब यदि वस्तु पर कोई बाह्य बल लगाया जाता है तो उसके वेग में परिवर्तन होगा जिससे की इसके संवेग में भी परिवर्तन होगा इस प्रकार वस्तु पर लगने वाला बाह्य बल और संवेग के बीच एक संबंध बन जाता है इसलिए न्यूटन के गति का द्वितीय नियम जो की बल और संवेग में परिवर्तन के बीच संबंध को दर्शाता है। 


तृतीय नियम (Newton's third law of motion)


"प्रत्येक क्रिया के बराबर तथा विपरीत दिशा में प्रतिक्रिया होती है। इस नियम के अनुसार जब किसी एक वस्तु द्वारा किसी दूसरे वस्तु पर बल लगता है तो जितना बल पहले वस्तु द्वारा दूसरे पर लगा ठीक उतना ही बल दूसरे वस्तु द्वारा भी पहले वस्तु पर लगता है पर इनकी बल की दिशा विपरीत होती है। 

न्यूटन के गति तृतीय नियम का उदाहरण


(i) कुएं से पानी निकालते समय पानी से भरी बाल्टी के रस्सी के अचानक टूटने पर यात्री का पीछे गिर जाना। 

व्यक्ति द्वारा बाल्टी को खींचने के लिए ऊपर की ओर जितना बल रस्सी पर लगाया जाता है रस्सी द्वारा भी उतना ही बल उस व्यक्ति पर लगाया जाता है रस्सी के तनाव के कारण उतना ही बल व्यक्ति पर भी लगते रहता है।

इस प्रकार व्यक्ति के द्वारा लगाया गया बल क्रिया बल होता है तथा रस्सी के द्वारा व्यक्ति पर लग रहा बल प्रतिक्रिया बल होता है।

इस प्रकार रस्सी के अचानक टूट जाने पर प्रतिक्रिया बल तुरंत ही समाप्त हो जाती है और व्यक्ति क्रिया की दिशा में अचानक से पीछे की ओर गिर पड़ता है। 

(ii) बंदूक चलाने वाले व्यक्ति को गोली चलाने पर पीछे की ओर धक्का लगता है।

बंदूक के अंदर बारूद होती है इसके जलते ही गैस उत्पन्न होने लगती है यह गैस गोली पर बल लगाना शुरू कर देती है जिससे की गोली बहुत ज्यादा वेग से आगे की ओर जाने लगती है इसके विपरीत गोली भी पीछे की ओर बल लगाती है जिससे कि बंदूक चलाने वाले को पीछे की ओर धक्का लगता है। 

(iii) व्यक्ति का नाव से उतरते समय किनारे पर कूदते ही नाव के पीछे चले जाना

व्यक्ति के नाव से किनारे पर कूदते ही व्यक्ति के पैर द्वारा नाव पर पीछे की ओर बल लगता है यह क्रिया बल होता है
लेकिन न्यूटन के गति के तृतीय नियम के अनुसार नाव भी उतना ही प्रतिक्रिया बल व्यक्ति पर आगे की ओर लगाता है जिससे की व्यक्ति आगे की ओर किनारे पर चला जाता है और नाव पीछे की ओर चले जाता है। 

(iv) तैरते समय व्यक्ति द्वारा पानी को पीछे की ओर हटाना

हाथ पीछे करते समय व्यक्ति के द्वारा पानी पर क्रिया बल लगते रहता है इसी प्रकार पानी भी व्यक्ति पर उतना ही प्रतिक्रिया बल लगाते रहती है जिससे कि व्यक्ति आगे की ओर चले जाता है।

(v) व्यक्ति का चलना

व्यक्ति जब जमीन पर चलते रहता है तो जमीन पर पैर के द्वारा नीचे की ओर बल लगाते रहता है इस प्रकार गति के तृतीय नियम के अनुसार जमीन द्वारा व्यक्ति के पैर पर भी प्रतिक्रिया बल इसके विपरीत दिशा में लगता है जिससे व्यक्ति आगे की ओर आगे बढ़ता है। 

(vi) रेत वाली जमीन पर व्यक्ति का चलना कठिन होता है

व्यक्ति जब रेत पर चलता है तो व्यक्ति अपने पैर को तिरछा करते हुए जमीन पर बल लगाते रहता है और उसका पैर रेट पर धसता हैं इस प्रकार जमीन से प्राप्त होने वाला प्रतिक्रिया बल का मान बहुत ही कम होता है जिससे व्यक्ति को रेतीले जमीन पर चलना कठिन होता है। 

(vii) बर्फ पर चलना मुश्किल होता है

बर्फ और पैर के बीच लगने वाले घर्षण बल का मान बहुत ही कम होता है जिससे कि बर्फ पर चलने के लिए व्यक्ति को जितने प्रतिक्रिया बल की आवश्यकता होती हैं उतना नहीं मिल पाता है जिससे कि व्यक्ति बर्फ पर नहीं चल पाता है।

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