जड़त्व (Inertia) - ldkalink
जड़त्व (Inertia): जड़त्व का कई सारे उदाहरण हम अपने दैनिक जीवन में देखते ही हैं आपने कभी नोटिस भी किया होगा कि किसी कमरे में रखी वस्तुएं जैसे कि टेबल, कुर्सी, पंखा, पुस्तक आदि वस्तुएं अगर किसी जगह पर स्थिर अवस्था में रखी होती है तो वह उसी जगह पर ही रहेगी है वह अपने आप अपनी स्थिति नहीं बदल सकती है।
इसी तरह से मान लो कोई वस्तु जैसे कि एक बाल फर्श पर गतिमान अवस्था में है तो हम देखते हैं कि वह कुछ देर बाद में थोड़ी दूरी तय करके रुक जाती है इस बॉल रुकने का एक कारण यह है कि फर्श और बाल के बीच में घर्षण बल कार्य करते रहता है।
जरा सोचो कि यदि फर्श और बाल के बीच में अगर घर्षण बल नहीं होता तो बाल क्या रुकती, बाल नहीं रुकती बाल और जमीन के बीच घर्षण बल होने के कारण ही थोड़ी देर बाद वह विराम अवस्था में आती है अर्थात किसी वस्तु की स्थिति में परिवर्तन करने के लिए बाह्य बल की आवश्यकता होती है।
अर्थात कोई भी वस्तु चाहे वह गति अवस्था में हो या विराम अवस्था में हो वह खुद से यानि स्वतः ही अपने स्थिति में परिवर्तन नहीं कर सकता है वस्तु का यह गुण जड़त्व कहलाता है इसी बेस पर जड़त्व को हम निम्न प्रकार से परिभाषित कर सकते हैं।
![]() |
| जड़त्व (Inertia) किसे कहते हैं |
जड़त्व किसे कहते हैं
जड़त्व की परिभाषा: जड़त्व किसी वस्तु का वह गुण है जो किसी वस्तु की विरामावस्था अथवा गत्यावस्था में खुद से परिवर्तन नहीं कर पाता अर्थात स्वतः परिवर्तन में असमर्थ होता है उसका जड़त्व कहलाता है।
जड़त्व की माप
किसी भी वस्तु के जड़त्व की माप उसके द्रव्यमान से की जाती है जिस वस्तु का द्रव्यमान अधिक है उसका जड़त्व भी अधिक होगा और जिस वस्तु का द्रव्यमान कम होता है तो उस वस्तु का जड़त्व भी कम होगा।
भौतिकी छेत्र के महान वैज्ञानिक गैलीलियो द्वारा पूर्व में यह बताया गया था की यदि कोई वस्तु एक समान वेग से चल रही है तो वस्तु के इस वेग को एक समान बनाए रखने के लिए एक बल की आवश्यकता होती है।
किंतु बाद में प्रयोग द्वारा यह बताया गया की वस्तु के एक समान गति को बनाए रखने के लिए बल की आवश्यकता नहीं होती है।
इसके द्वारा बताया गया की जो वस्तु स्थिर अवस्था में होती है वह स्थिर ही रहेगी यदि गतिमान है तो गतिमान ही रहेगा जब तक की इस पर कोई बाह्य बल न लगाया जाए इसे जड़त्व का भी नियम कहा जाता है।
उदाहरण (Udaharan )
मान लो दो गाड़ी एक ट्रक और दूसरा कार है दोनों विराम अवस्था में है अब यदि इन दोनो को धक्का दे के एक जगह से दूसरे जगह पर ले जाना है तो हमें इसे धक्का देने के लिए ट्रक पर ज्यादा बल लगाने की जरूरत होगी और कार पर कम बल लगाना पड़ेगा।
ट्रक पर ज्यादा पर लगाया जा रहा है इसलिए ट्रक का जड़त्व अधिक होगा और कार का जड़त्व कम होगा इस प्रकार किसी भी वस्तु के जड़त्व की माप उसके द्रव्यमान से की जाती है।
जड़त्व के प्रकार (Kind of Inertia)
जड़त्व तीन प्रकार के होते है:-
- विराम का जड़त्व
- गति का जड़त्व
- दिशा का जड़त्व
1. विराम का जड़त्व (Inertia of rest)
किसी वस्तु का वह गुण जिसके कारण वह खुद से अपनी विरामावस्था में परिवर्तन नही कर पता है अर्थात स्वतः ही स्थिति परिवर्तन में असमर्थ रहता है इसे विराम का जड़त्व कहा जाता है।
विराम जड़त्व उदाहरण
(i) बस के अचानक चलने पर यात्री का पीछे गिरना:
जब बस स्थिर अवस्था में होता है तो इसमें बैठा व्यक्ति भी स्थिर अवस्था में होता है लेकिन जब बस गतियावस्था में आता है तो उसमें बैठे यात्री के कमर का निचला हिस्सा बस के साथ जल्दी गति व्यवस्था में आ जाता है क्युकी इसका निचला हिस्सा ही बस के संपर्क में होता है।
किंतु उसके शरीर का ऊपरी हिस्सा विराम के जड़त्व के कारण विराम अवस्था में ही रहता है अतः इसलिए बस के एकाएक चलने पर यात्री का शरीर पीछे की ओर गिर जाता है।
(ii) घोड़े के अचानक चलने पर बैठा घुड़सवार का पीछे की ओर गिरना
घोड़े के अचानक चलने पर उसमे बैठा घुड़सवार के शरीर का निचला हिस्सा यानी उसके कमर के नीचे का हिस्सा जो घोड़े से लगा हुआ है घोड़े के साथ जल्दी गति अवस्था में आ जाता है।
लेकिन शरीर का ऊपरी हिस्सा विराम के जड़त्व के कारण विराम अवस्था में ही रहता है अतः घोड़े के एकाएक चलने पर घुड़सवार पीछे की ओर गिर जाता है।
(iii) कंबल को छड़ी से पीटने पर धूल के कारण का गिरना
जब कंबल को छड़ी से मारा जाता है तो वह भाग जिस जगह पर मारा गया वह जगह तुरंत ही गति अवस्था में आ जाता है लेकिन भूल के कारण विराम के जड़त्व के कारण विराम अवस्था में ही रहता है और नीचे गिर जाते है।
(iv) पेड़ को हिलाने पर उसमें लगे पके फल का नीचे गिर जाना
पेड़ को हिलाने पर इनकी डालिया गति अवस्था में आ जाते है पर इन पर लगा फल विराम के जड़त्व के कारण विरामावस्था में ही रहता है अतः फल नीचे गिर जाता है।
(v) बंदूक की गोली कांच पर लगने पर कांच में छेद हो जाता है पर पत्थर मारने पर वह टुकड़ा टुकड़ा हो जाता है
गोली का वेग बहुत ज्यादा होता है जब यह कांच से टकराता है तो सिर्फ वही भाग गति में आता है जहा गोली लगी है और कांच का शेष भाग विराम जडत्व के कारण विरामावस्था में ही रहता है ।
लेकिन जब पत्थर कांच से टकराता है तो इसका वेग कम होने के कारण यह कांच के पूरे भाग को प्रभावित करता है और इसके लिए उसे पर्याप्त समय मिल जाता है इसलिए कांच का टुकड़ा दुकड़ा हो जाता है।
(vi) ग्लास के ऊपर कार्ड रख कर उस पर सिक्का रखा जाए अब यदि कार्ड को तेजी से मारकर हटाया जाए तो सिक्का ग्लास में गिर जाता है
जब कार्ड को धक्का दिया जाता है तो वह गति अवस्था में आ जाता है लेकिन सिक्का विराम के जड़त्व के कारण विरामावस्था में ही रहता है इस तरह से सिक्का ग्लास में गिर जाता है।
2. गति का जड़त्व (inertia of motion)
वस्तु का वह गुण जिसके कारण वह स्वत: ही एक समान चाल से चल रहे एक सरल रेखा की गति में परिवर्तन करने में असफल रहता है यह गति का जड़त्व कहलाता है।
गति के जड़त्व का उदाहरण
(i) गतिमान बस के अचानक रुकने पर उसमें बैठे यात्री का आगे की ओर झुकना
जब बस गतिमान अवस्था में होता है तो उस में बैठा व्यक्ति भी गतिमान आस्था में होता है लेकिन जब बस अचानक रुकता है तो उसमें बैठें यात्री के कमर का निचला हिस्सा जोकि बस के संपर्क में होता है जल्दी बस के साथ विरामावस्था में आ जाता है।
लेकिन शरीर का ऊपरी हिस्सा अभी भी गति के जड़त्व के कारण गत्यावस्था में ही रहता है इसलिए बस के अचानक रुकने पर व्यक्ति का शरीर आगे की ओर झुक जाता है।
(ii) घोड़े के अचानक रुकने पर उसमे बैठा यात्री का अचानक सामने की ओर गिरना
जब घोड़ा गतिमान अवस्था में होता है तो उस में बैठा व्यक्ति भी गतिमान अवस्था में ही रहता है लेकिन घोड़ा के अचानक रुकने पर उसमें बैठे व्यक्ति के कमर का निचला हिस्सा जोकि घोड़े के संपर्क में रहता है जल्दी विराम अवस्था में आ जाता है।
लेकिन शरीर के कमर के ऊपर का हिस्सा गति के जड़त्व के कारण गति अवस्था में ही होता है इसीलिए घोड़े के अचानक रुकने पर बस में बैठा व्यक्ति का शरीर आगे की ओर झुक जाता है।
(iii) व्यक्ति का चलती बस से उतरने पर व्यक्ति का बस की दिशा में गिरना
चलती बस से उतरने पर जब व्यक्ति द्वारा जमीन पर पैर रखा जाता है तो जमीन पर पैर रखते ही पैर तुरंत विरामावस्था में आ जाता है किन्तु शरीर का ऊपरी हिस्सा गति के जड़त्व के कारण गत्यावस्था में ही रहता है जिसके करना व्यक्ति बस के चलने की दिशा में गिर जाता है।
(iv) लम्बी कूद वाला खिलाडी कूदने के लिए कुछ दुरी से दौड़ते हुए आता है
दौड़ते रहने से व्यक्ति का पूरा शरीर गति के अवस्था में आ जाता है और गति के जड़त्व के कारण ही व्यक्ति अधिक दुरी तक कूदने के सफल हो पता है।
3. दिशा का जड़त्व (Inertia of direction)
वस्तु का वह गुण जिससे की वह स्वतः ही गति की दिशा में परिवर्तन करने में असफल रहता है इसे दिशा का जड़त्व जाता है।
दिशा के जड़त्व का उदाहरण
(i) बस के वृत्तीय मोड़ पर मुड़ते समय इसमें बैठा व्यक्ति केंद्र के बाहर की ओर एक बल का अनुभव करता है
बस के वृत्तीय मोड़ पर मुड़ने पर व्यक्ति का निचला हिस्सा बस मुड़ने की दिशा में मुड जाता है पर ऊपर का हिस्सा गति के जड़त्व के कारण गति अवस्था में ही रहता है अतः व्यक्ति को केंद्र के बाहर की ओर एक बल का अनुभव होता है।
(ii) रस्सी के एक सिरे पर पत्थर बांधकर क्षैतिज वृत्त पर घुमाया जाता है अब यदि रस्सी को काट दिया जाता है तो पत्थर सपर्श रेखा के अनुदिश कुछ दुरी पर जाकर गिरता है।
वित्तीय मार्ग पर गति कर रहा पत्थर की किसी बिंदु पर वेग की दिशा उस बिन्दु पर स्पर्श रेखा की दिशा को व्यक्त करता है इसलिए रस्सी की काटते ही पत्थर की दिशा के जड़त्व के वजह से स्पर्श रखा के अनुदिश कुछ दुरी चले जाता है।
