Tally prime में E-Way Bill क्या होता है और कब जरुरी है? Rules, Limit aur Validity

Tally prime में E-Way bill (electronic way bill) Kya Hai और कब जरुरी होता है? (Step-by-Step Guide 2026): यह एक डिजिटल डॉक्यूमेंट की तरह होता है जो माल यानी की गुड्स ट्रांसपोर्ट करने के लिए जरूरी होता है।


जब भी किसी भी सामान को कहीं एक जगह से लेकर किसी दूसरी जगह पर पहुंचना होता है तो ऐसे में जीएसटी पोर्टल पर इसका ऑनलाइन करना जरूरी होता है इसे हम अपने सरल शब्दों में कुछ इस प्रकार से समझ सकते हैं।


E-Way Bill Kya Hai aur Kab Zaroori Hota Hai Rules and Limit Chart 2026Hindi Me
Tally prime में E-Way Bill क्या होता है और कब जरुरी है?

E-Way (electronic way bill) क्या है 

ई वे बिल किसी भी सामान के लिए एक "डिजिटल पासपोर्ट" की तरह काम करता है जो सामान को एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंचने की अनुमति देता है इसे हम "ऑनलाइन रोड परमिट" की तरह भी समझ सकते हैं। 


जब कोई बिजनेस अपने किसी सामान (गुड्स) को एक जगह से लेकर दूसरी जगह किसी गाड़ी के माध्यम जैसे कि ट्रक, टेंपो ट्रेन आदि से भेजता है तो सरकार द्वारा बनाए गए जीएसटी पोर्टल पर इस सामान का ऑनलाइन बिल जनरेट करना ही पड़ता है और इस डिजिटल डॉक्यूमेंट को ही ई वे बिल कहा जाता है। 


अब आप अच्छे से समझ गए होंगे कि टैली प्राइम में ई वे बिल क्या होता है अब हम यह भी जान लेते हैं कि ई वे बिल कब जरूरी होता है।


E-Way (electronic way bill) कब जरुरी होता है


ई वे बिल हर सामान पर जारी करने की जरूरत नहीं होती है यह कब जरूरी होता है ऐसे नीचे समझते है: 


  • जब कोई सामान जो की किसी गाड़ी में भिजवाया जा रहा है अगर उसकी कुल कीमत यानी की इनवॉइस वैल्यू अगर 50,000 है या इससे ज्यादा है। 

  • अब सामान चाहे एक ही स्टेट के अंदर जैसे (छत्तीसगढ़ में बिलासपुर से रायपुर) के अंदर भेजना हो या फिर दूसरे स्टेट जैसे कि (छत्तीसगढ़ से महाराष्ट्र) भेज रहे हो। 


अभी तक आपने GST Professional accounting course में ई वे बिल क्या होता है और कब इसकी जरूरत पड़ती है इसको अच्छे से समझ लिया है। 


अब हम utkarsh classes, Tally prime rajnandgaon के Complete Business Management Guide के इस आर्टिकल में E-Way bill को एक रियल लाइफ के उदाहरण से समझने का प्रयास करते हैं जो हम हमेशा अपने दिनचर्या में देखते हैं।


मान लो की आपका एक इलेक्ट्रॉनिक का दुकान है और आपके द्वारा रायपुर के एक थोक व्यापारी जिसे होलसेलर कहा जा सकता है से डेढ़ लाख का कंप्यूटर खरीदा जा रहा है:


  • अब वह होलसेलर जिससे आपके द्वारा सामान खरीदा गया है सामान ज्यादा होने के कारण परचेज किए गए कंप्यूटर को एक मिनी ट्रक में लोड कर देगा। 

  • अब ट्रक को भेजने से पहले वह गवर्नमेंट की एक वेबसाइट जीएसटी पोर्टल पर लॉगिन करके बताया कि उसके द्वारा डेढ़ लाख का सामान इस ट्रक नंबर (CG08 1234) में भेजा जा रहा है। 


अब पोर्टल पर ऑनलाइन होने से पोर्टल एक 12 डिजिट का ई वे बिल नंबर जनरेट करता है और एक qr कोड भी जनरेट करता है। 


होलसेलर द्वारा बिल जनरेट करने के बाद इसका प्रिंट आउट लेकर उसे गाड़ी के ड्राइवर को दे दिया जाता है जिसके द्वारा भिजवाया जा रहा है।


रास्ते में अगर कोई सेल्स टैक्स ऑफिसर यानी कि जीएसटी ऑफीसर यदि इस ट्रक को रोकता है और चेक करता है तो ड्राइवर द्वारा ए वे बिल दिखा दिया जाता है।


इस तरह से ड्राइवर को सामान एक जगह से दूसरे जगह ले जाने पर किसी तरह का कोई भी दिक्कत नहीं आता है। 


ई वे बिल में मुख्य रूप से दो पार्ट होते है


जब किसी होलसेलर द्वारा ई वे बिल जनरेट किया जाता है तो इसमें क्या डिटेल होती है तो इसमें मुख्य रूप से दो पार्ट्स होते हैं: 


  • Part A में सामान की डिटेल्स होती है: इस सेक्शन में भेजने वाले यानी कि सप्लायर और सामान पाने वाला यानी कि जो खरीद रहा है दोनों का जीएसटी नंबर, सामान का नाम,  एचएसएन कोड और सामान की टोटल वैल्यू यानी कि कितने का समान है इसकी पूरी जानकारी होती है। 
  • Part B में गाड़ी की डिटेल्स होती है: इस सेक्शन में उस गाड़ी की डिटेल को भरा जाता है जिस गाड़ी में सामान को भिजवाया जा रहा है यदि इसमें गाड़ी के नंबर का उल्लेख नहीं होता है तो इसे इनवेलिड माना जाता है। 


ई-वे बिल कब तक वैलिड माना जाता है (वैलिडिटी पीरियड) 


एक बार ई वे बिल जनरेट करने के बाद यह हमेशा के लिए वैलिड नहीं होता है बल्कि यह इस बात पर निर्भर करता है कि सामान को कितनी दूर जाना है। 


  • यदि डिस्टेंस 200 किलोमीटर तक के लिए है: तो सामान को पहुंचने के लिए एक दिन का समय यानी की 24 घंटे का समय मिलता है। 
  • अब यदि डिस्टेंस 200 किलोमीटर से ऊपर है (250 km) है: तो ऐसे में आपको एक दिन एक्स्ट्रा का समय मिल जाता है इसका मतलब है कि अब समान को उस जगह पर जहां पर भेजा जा रहा है पहुंचने के लिए 2 दिन का समय मिल जाता है। 


ई वे बिल नहीं बनाए जाने पर क्या होता है 


यदि किसी कंडीशन में आपके द्वारा बेचे जा रहा सामान जिसकी कीमत 50000 से ऊपर है और आपके द्वारा बिल जनरेट नहीं किया गया है तो ऐसी कंडीशन में सरकार पेनल्टी लगा सकती है जो कि टैक्स अमाउंट के बराबर या उससे अधिक भी हो सकता है ऑफिसर द्वारा गाड़ी और सामान दोनों को तब तक अपने पास रख सकती है जब तक कि आप पेनल्टी ना भरे।


जब आप टैली प्राइम में काम कर रहे होते हैं और आपका कोई भी बिल 50000 से ऊपर पहुंचता है तो आपको खुद बता देता है कि आपको ई वे बिल जनरेट करने की जरूरत है।


इस तरह से आप आसानी से ही गाड़ी का नंबर डालकर उसके डिटेल डालकर ई वें बिल जेनरेट  टैली प्राइम की सहायता से कर सकते हैं और अलग से आपको पोर्टल पर बार-बार टाइप करने का जरूरत नहीं पड़ती है।


क्या आप अपने घर बैठे ही बिज़नेस मैनेज करना चाहते है टैली प्राइम से, तो टैली प्राइम को और जायदा अच्छे से समझने के लिए निचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके आप इसके बारे में और ज्यादा जानकारी प्राप्त कर सकते है।

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