विधुत चुम्बकीय प्रेरण किसे कहते हैं/electromagnetic induction
विधुत चुम्बकीय प्रेरण किसे कहते है: सन् 1820 में वैज्ञानिक हैंस क्रिश्चियन आस्टेड ने अपने एक प्रयोग में बताया कि जब किसी चालक में विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है तो उसके आसपास चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न हो जाता है।
जब उसने अपने प्रयोग में पाया कि किसी चालक में धारा प्रवाहित करने से उसके आसपास चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न हो जाता है तो ठीक इसके विपरीत एक प्रश्न यह भी सामने आने लगा की क्या चुंबकीय क्षेत्र से भी विद्युत क्षेत्र उत्पन्न किया जा सकता है।
इस प्रश्न का उत्तर पाने के लिए इंग्लैंड के वैज्ञानिक माइकल फराडे तथा अमेरिका के वैज्ञानिक जोसेफ हेनरी दोनों ने मिलकर प्रयोग करके इसका उत्तर ढूंढने की बहुत कोशिश करते रहे।
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| विधुत चुंबकीय प्रेरण किसे कहते हैं |
इस तरह से फैराडे ने अपने चुंबक और धारामापी कुंडली के बीच अपने प्रयोग को जारी रखा पर उन्हें किसी तरह की कोई सफलता नहीं मिली।
और इस तरह से प्रयोग करते-करते एक दिन चुंबक को कुंडली के बीच में फेंक दी तभी इन्होंने देखा कि चुंबक को कुंडली में फेंकने से धारामापी में विक्षेप होने लगा।
अब इन्होंने अपने प्रयोग द्वारा 1831 में बताया कि चुंबक को तार लूप के पास या दूर ले जाने पर लूप में विद्युत धारा उत्पन्न होने लगती है।
इसी तरह से यदि चुंबक को स्थिर रखकर तार लूप को आगे पीछे चलाया जाता है तो भी इस स्थिति में लूप में विद्युत धारा प्रवाहित होने लगती है इस परिघटना को विधुत चुम्बकीय प्रेरण कहा जाता है अतः विद्युत चुंबकीय प्रेरण को निम्न प्रकार से परिभाषित किया जा सकता है।
विधुत चुंबकीय प्रेरण किसे कहते हैं ?
electromagnetic induction in Hindi: "जब एक बंद लूप और एक चुंबक के बीच अपेक्षित गति होती है तो बंद लूप में विधुत धारा प्रवाहित होने लगती है इसे प्रेरित धारा कहा जाता है और जिस विद्युत वाहक बल के कारण विद्युत धारा प्रवाहित होती है इसे प्रेरित विधुत वाहक बल कहा जाता है और इस परिघटना को ही विद्युत चुंबकीय प्रेरण कहलाता है।"
